समाज की तमाम क्रूरताओं के बीच धनंजय के संघर्ष की कहानी | In Conversation with Dhananjay

धनंजय चौहान को अपनी पहचान की वज़ह से जो प्रताड़नाएं झेलनी पड़ी हैं, वो इस समाज के चरित्र को नुमाया करती हैं। हमारे समाज की तमाम क्रूरताओं के बीच धनंजय ने अपनी पहचान के लिए लड़ना ज़रूरी समझा और उसे हासिल भी किया।

हम लड़ेंगे साथी… जब तक दुनिया में लड़ने की ज़रूरत बाकी है

जेंडर बराबरी, लैंगिक विमर्शों की तमाम बहसों के बीच हम सभी एक रॉन्ग वर्ल्ड में जी रहे हैं, जिसे राइट बनाने की ज़िम्मेदारी बेशक हम सभी की है और इसके लिए ज़रूरी है कि हम ख़ुद के भीतर एक बेहतर समझाइश पैदा करें और उसे हर रोज़ बेहतर करते रहें। हमारी लर्निंग  और अनलर्निंग की कोशिशें साथ साथ चलती रहें- यह भी बहुत ज़रूरी है। 

गाँव गाँव पुस्तकालय के खूबसूरत सपने को आकार देता सीमांचल लाइब्रेरी फाउंडेशन

आज सिटिज़न्स टुगेदर के प्लेटफार्म से हम जिस गुफ़्तगू में शामिल हो रहे हैं, वह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि हम आज ऐसे शख्स से बातचीत कर रहे हैं, जिन्होंने अपने आस पास की दुनिया को बेहतर बनाने के लिए अनिश्चितताओं का चुनाव किया, जो यकीन करते हैं कि दुनिया को समझने का, उसे बेहतरी से बदलने का रास्ता किताबों से होकर गुज़रता है। 'गाँव गाँव पुस्तकालय' का एक खूबसूरत सपना वे सिर्फ देख नहीं रहे उसे सच बनाने की मुहिम में लगे हुए हैं। सीमांचल लाइब्रेरी फाउंडेशन उनके बेहतरीन प्रयासों का एक खूबसूरत परिणाम है।