इंकलाब और मुहब्बत से लबरेज़ अहमद फ़राज़

अगर मैं अपने आस-पास होने वाली दुखद घटनाओं का मूक दर्शक बना रहा तो मेरी अंतरात्मा मुझे माफ नहीं ...

भाषाएँ पूरे जीवन को अपने कंधों पर उठा कर चलती हैं – सत्यपाल सहगल

सवाल करना हल की दिशा में पहला कदम है। इसलिए हर ज़रूरी मसलों पर सवाल उठाते रहना चाहिए। फ़र्क पड़ता है ...

The Curse of “Unlimited”

Life is beautiful when it is balanced. And the balance could only be achieved when human leave and ...

संस्थाएं स्वतंत्र और निर्भीक व्यक्तियों को अफोर्ड ही नहीं कर सकती – शायदा बानो

हम इंसान के तौर पर कहाँ जा रहे हैं हैं मुझे नहीं मालूम।, इसमें हमारे समाज का ढांचा कितना  जिम्मेदार ...

“आपने घबराना नहीं है” के स्लोगन के साथ एक सुंदर जगह सिरजता सीमांचल लाइब्रेरी फाउंडेशन

साकिब कहते हैं: "दरअसल सीमित संसाधन होने की वजह से हमारा कैनवास थोड़ा छोटा है। इसलिए जो बच्चे लगातार ...

एक बेहतर समाज के लिए मौलिक चिंतन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है – सुरजीत पातर

सामाज में जो क्लास डिविजन है, उसमें हायर क्लास के लोगों को लगता है कि उनके कपडे भी अलग हों और ज़बान ...

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